हरिद्वार: शिक्षा जगत और शोध संस्कृति में भारतीय ज्ञान-परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किया। सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रख्यात शिक्षाविद, प्राच्यविद्या के विद्वान, शोधार्थी और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल डॉ. बिसेन ने कहा कि शिक्षा का मूल ध्येय केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह चरित्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण का आधार बनती है। प्राच्यविद्या के अध्ययन को अतीत के पुनरावलोकन से आगे ले जाते हुए उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता, वैचारिक विमर्श और मानव समाज के बौद्धिक इतिहास को समझने का सशक्त माध्यम बताया।शिक्षा और अनुसंधान के मानकों पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने युवा शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे प्राचीन ग्रंथों के मूल पाठ, दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का गहराई से अध्ययन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा और शोध क्षेत्र में साक्ष्यों की प्रामाणिकता, निष्कर्षों की पारदर्शिता और बौद्धिक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।राज्यपाल ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान-परंपरा, मातृभाषाओं के संवर्धन, बहुविषयक शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को विशेष प्रोत्साहन देती है। ‘विकास भी, विरासत भी’ की सोच आधुनिक तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक जड़ों के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करती है। इसी कड़ी में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण को भावी पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण बताया।विश्व में व्याप्त पर्यावरणीय, सामाजिक और नैतिक संकटों का संदर्भ देते हुए राज्यपाल ने कहा कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मंगलभाव ही ज्ञान का सर्वोच्च ध्येय है। भारतीय दर्शन की संतुलन और सह-अस्तित्व पर आधारित दृष्टि आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पतंजलि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न शोध एवं अकादमिक ग्रंथों का लोकार्पण भी किया।सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुंभ मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित भारतीय विद्वत् परिषद् के प्रतिनिधि, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, आचार्य एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे।
पतंजलि विश्वविद्यालय में प्राच्यविद्या सम्मेलन का आग़ाज़, राज्यपाल ने दिया संस्कृति और आधुनिकता के समन्वय का संदेश
