रुड़की:उत्तराखंड के रुड़की में अवैध खनन के खेल में एक ऐसा हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है, जिसने महकमे की कलई खोलकर रख दी है। इमलीखेड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज सैनी ने जब सोमवार की रात के अंधेरे में दौड़ रहे अवैध खनन के डंपरों पर खुद ‘छापा’ मारा, तो मौके पर सनसनी फैल गई। अध्यक्ष ने एक-दो नहीं बल्कि पूरे दस डंपर धर दबोचे और ऐसा चक्रव्यूह रचा कि खनन माफियाओं के पसीने छूट गए। नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज सैनी ने पत्रकारों को पूरा वाकया बताते हुए कहा कि उन्होंने रात में जो दस डंपर पकड़े थे, उनका कच्चा चिट्ठा कांटा पर्ची कराते ही सामने आ गया। जांच में पता चला कि इनमें से सिर्फ 8 डंपरों के पास ही रॉयल्टी थी, जबकि दो डंपर पूरी तरह अवैध तरीके से बिना किसी अनुमति के चलाए जा रहे थे। हद तो तब हो गई जब कांटा पर्ची पर वजन देखा गया, तो सभी के सभी दस डंपर ओवरलोड मिले। अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने तुरंत मौके पर एआरटीओ रुड़की हरीश को बुलाया था, लेकिन तब साहब ने मौके पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मंगलवार को एआरटीओ साहब ने कार्रवाई करने की बात कही थी, मगर इसके बजाय डंपरों को तीतर-बितर करने का खेल शुरू हो गया। रुड़की विधायक और मंत्री प्रदीप बत्रा का ज़िक्र करते हुए मनोज सैनी ने बताया कि इन खनन सामग्री से भरे डंपरों को बेलड़ा कार्यालय के लिए रवाना किया गया, तो वहां पहुंचते ही ऐसा ‘जादू’ हुआ कि अध्यक्ष और उनके साथ मौजूद चीनू पंडित व ग्रामीण भौचक्के रह गए। जब नगर पंचायत अध्यक्ष अपने समर्थकों और ग्रामीणों का लवाजमा लेकर बेलड़ा स्थित एआरटीओ कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा देख आंखें फटी की फटी रह गईं। दस में से नौ डंपर खाली हो चुके थे और तीतर-बितर कर दिए गए थे। रही-सही कसर तब पूरी हुई जब अध्यक्ष ने एआरटीओ हरीश को फोन मिलाया, तो उनका फोन भी ‘स्विच ऑफ’ मिला और साहब कार्यालय से रफूचक्कर हो चुके थे।अधिकारियों की इस खुली कारगुजारी और खनन माफियाओं के साथ इस सांठगांठ को देख अध्यक्ष और उनके समर्थकों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने फौरन मीडिया को बुलाया और एआरटीओ कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान बयानबाजी में केवल एआरटीओ पर ही निशाना नहीं साधा गया, बल्कि नगर ग्रामीणों ने सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री के ऊपर भी गंभीर सवाल उठाए जिससे राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल आ गया है। अब इलाके में एक ही चर्चा है कि अगर नगर पंचायत अध्यक्ष और चीनू पंडित के दावे सही है। तो क्या एआरटीओ रुड़की और खनन माफियाओं की यह मिलीभगत साफ नजर नहीं आती? क्या नियमों को ताक पर रखकर यूं ही खनन का खेल चलता रहेगा? क्या कोई बड़ा अधिकारी इस सनसनीखेज मामले का संज्ञान लेगा, या जनता के बीच हमेशा के लिए यही अवधारणा कायम रहेगी कि खनन कारोबारी, जिम्मेदार अधिकारी की साठगांठ यूं ही बरकरार रहने वाली है?
ऊंट किस करवट बैठा! इमलीखेड़ा अध्यक्ष ने पकड़े ओवरलोड भरे डंपर, एआरटीओ साहब बोले- ‘कार्यालय आ जाओ’, लवाजमा लेकर पहुंचे दफ़्तर तो 9 डंपर खाली और फोन बंद!
