दिवाली पर सहदेवपुर रोड बाजार में पसरा सन्नाटा: ई-कॉमर्स और ’15-मिनट डिलीवरी’ के दौर में स्थानीय व्यापारियों का व्यापार संकट में

बहादराबाद : रोशनी और उल्लास के पर्व दीपावली के ठीक पहले जहां एक ओर बाजारों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं पतंजलि सहदेवपुर रोड स्थित मार्केट के व्यापारियों के चेहरे पर गहरी चिंता और मायूसी साफ देखी जा सकती है। इस बार त्योहारी सीजन में ग्राहकों की बेरुखी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते दबदबे से स्थानीय दुकानदारों में भारी रोष और निराशा का माहौल है।व्यापारियों का कहना है कि किराने के सामान से लेकर मिठाइयों और अन्य त्योहारी साज-सज्जा के सामान तक, हर जरूरत ऑनलाइन मिलने लगी है। जब से ऑनलाइन और त्वरित डिलीवरी का कॉन्सेप्ट बाजार में आया है, तब से स्थानीय बाजारों की रौनक और पारंपरिक व्यापार दोनों पर गंभीर असर पड़ा है। सड़क किनारे और दुकानों के आगे त्योहारी सामान के स्टाल सजाकर बैठे व्यापारियों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि पूरा-पूरा दिन केवल स्टाल पर बैठकर ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है। दिनभर सन्नाटा रहता है और शाम को बमुश्किल थोड़ी बहुत दुकानें चलती हैं, जिसमें बिक्री नाममात्र की होती है।व्यापारियों ने निराशा जताते हुए कहा कि इस बार उम्मीद थी कि त्योहारी सीजन में बिक्री अच्छी होगी, लेकिन ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव ने हालात बिगाड़ दिए हैं। मुनाफे की बात तो बहुत दूर है, अब तो बस यही डर सता रहा है कि जो पूंजी लगाकर सामान मंगवाया है, कम से कम उसकी लागत ही निकल आए और सामान पूरा बिक जाए। ऑनलाइन वेबसाइट्स और ई-कॉमर्स के पंद्रह मिनट के कॉन्सेप्ट ने स्थानीय व्यापारियों के लिए जीवनयापन करना मुश्किल कर दिया है।इस गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए क्षेत्र के संभ्रांत लोगों और दुकानदारों ने अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

समाजसेवी तेजप्रताप सैनी ने स्थानीय बाजार की स्थिति पर दुख जताते हुए कहा कि ऑनलाइन शॉपिंग और झटपट डिलीवरी के नाम पर बाजार की रीढ़ तोड़ी जा रही है। सहदेवपुर रोड के व्यापारी दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार रहे हैं। यदि लोग त्योहारी खरीदारी के लिए भी बाजारों का रुख नहीं करेंगे, तो ये छोटे दुकानदार और उनके परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे। हमें त्योहारी खरीदारी स्थानीय दुकानदारों से ही करनी चाहिए ताकि उनके घरों में भी दीये जल सकें।पंकज बेकरी संचालक ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि त्योहारों के दिनों में हमारी मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की अच्छी मांग हुआ करती थी, लेकिन अब लोग घर बैठे ऑनलाइन ऐप से सब मंगवा लेते हैं। हम पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते रह जाते हैं और शाम को मायूसी हाथ लगती है।स्थानीय निवासी अरविंद ने कहा कि सुविधा के चक्कर में हम अपनी स्थानीय संस्कृति और बाजारों को खोते जा रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के 15 मिनट वाले विज्ञापनों ने स्थानीय दुकानदारों का रोजगार छीन लिया है, जिससे बाजार की रौनक पूरी तरह गायब हो गई है। त्योहारों का मौसम छोटे दुकानदारों के लिए सालभर की सबसे बड़ी उम्मीद होता है, लेकिन सहदेवपुर रोड मार्केट के मौजूदा हालात यह बयां करने के लिए काफी हैं कि कैसे आधुनिक तकनीक और ई-कॉमर्स की आंधी ने स्थानीय और पारंपरिक व्यापार को गहरे संकट में धकेल दिया है।

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