हरिद्वार (बहादराबाद): बहादराबाद ग्राम पंचायत क्षेत्र में ग्राम समाज की भूमि के विनिमय से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। उच्च न्यायालय नैनीताल में इस प्रकरण पर हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्थगन आदेश को आगामी इसी वर्ष 15 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। इस मामले के न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण प्रशासनिक प्रक्रिया और विनिमय के औचित्य को लेकर विभिन्न सवाल उठ खड़े हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहादराबाद में ग्राम समाज की भूमि विनिमय प्रकरण में ग्रामीणों का दावा किया था कि विनिमय की गई ग्राम समाज की उक्त भूमि पर हरे-भरे पेड़ों और औषधि पौधों का बाग था, जिसमें कई फलदार वृक्ष भी मौजूद थे।
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय नैनीताल का दरवाजा खटखटाया था। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिस बैठक में भूमि विनिमय का प्रस्ताव पारित किया गया था, उसमें कुछ ग्राम पंचायत सदस्य उपस्थित नहीं थे और बाद में इस पर आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थीं। हालाँकि इस पूरे प्रकरण में ग्रामीणों द्वारा तात्कालिक अधिकारियो पर आरोप लगाए थे, कि विनिमय प्रक्रिया के दौरान आपत्तियों और भूमि की वास्तविक स्थिति का समुचित परीक्षण नहीं किया गया, जिससे कॉलोनाइजरों को कथित तौर पर लाभ पहुँचा। इस संबंध में किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत संलिप्तता या प्रशासनिक अनियमितता की पुष्टि अभी तक किसी आधिकारिक जांच या न्यायिक निर्णय द्वारा नहीं की गई है, और संबंधित पक्षों का पक्ष तथा प्रशासनिक जांच का निष्कर्ष आना शेष है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विनिमय के पश्चात संबंधित भूमि पर मार्ग का निर्माण कर भूखंडों की बिक्री से जुड़ी गतिविधियां सामने आई हैं। बहरहाल, उच्च न्यायालय द्वारा पारित स्थगन आदेश के बाद इस भूमि पर किसी भी प्रकार के आगामी कार्य और कानूनी स्थिति पर अदालत के अंतिम निर्णय का प्रभाव रहेगा। वर्तमान में बहादराबाद के स्थानीय निवासी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत निष्पक्ष स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। न्यायालय के आगामी आदेश के बाद ही इस विनिमय प्रक्रिया की वैधानिकता पर स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
