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प्रधान संपादक सनत शर्मा:—उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा आयोजित पंच दिवसीय राष्ट्रीय आनलाइन कार्यशाला का समापन सत्र आयोजित हुआ

BySANAT SHARMA

May 26, 2023

देवभाषा संस्कृत विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा : मुख्य शिक्षा अधिकारी

हरिद्वार। संपूर्ति सत्र का उद्घाटन कुलपति दिनेशचंद्र शास्त्री, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार गुप्ता, कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी एवं परियोजना समन्वयक डा. सुमन प्रसाद भट्ट ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर हरिद्वार के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार गुप्ता ने कहा कि देवभाषा संस्कृत विश्व की सबसे समृद्ध एवं वैज्ञानिक भाषा है। इसमें अपार ज्ञान विज्ञान समाया हुआ है जो जीवन के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबद्ध है। कहा कि उत्तराखंड सरकार ने संस्कृत भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर इसके विकास के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। संस्कृत भाषा के छात्रों एवं अध्यापकों के लिए तकनीकी का प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है जिससे वे अपने शास्त्रीय ज्ञान को जन जन तक पहुंचा सकते हैं। कहा कि संस्कृत में अनुसंधान की असीम संभावनाएं हैं जिसके लिए संस्कृत के छात्रों को तैयार करना होगा और उन्हें प्रशिक्षण देकर इस योग्य बनाना होगा कि वे संस्कृत के माध्यम से मानवता की सेवा कर सकें। कहा कि आयुर्वेद एवं ज्योतिष ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें तकनीकी ज्ञान का प्रयोग करके उन्हें समाजोपयोगी बनाया जा सकता है।

कुलपति दिनेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि संस्कृत सरल एवं सुगम भाषा है। लेकिन समाज में इसे कठिन भाषा के रूप में प्रचारित एवं प्रसारित किया गया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सरल मानक संस्कृत के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय दूर दराज के महाविद्यालयों के साथ मिलकर गूगल क्लासरूम के माध्यम से ज्ञान का हस्तांतरण कर एक नई मुहिम चला रहा है इससे जिन क्षेत्रों में विशेषज्ञ अध्यापकों का अभाव है वहां के छात्र भी लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों एवं छात्रों का आह्वान करके कहा कि संस्कृत को जन जन की भाषा बनाने के संस्कृत विश्वविद्यालय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए संस्कृत माध्यम से संस्कृत शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए मिलकर प्रयास करें।

कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। कहा कि संस्कृत में विद्यमान ज्ञान को तकनीकी के माध्यम से आम जनमानस तक पहुंचाया जा सकता है।

सह परियोजना प्रभारी सुशील चमोली ने कहा कि पांच दिवसीय राष्ट्रीय ऑनलाइन कार्यशाला में 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें 15 सत्रों में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, लाल बहादुर शास्त्री नेशनल संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, अनुवाक टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया।

इससे पूर्व मंगलाचरण वेद विभाग के अध्यक्ष डा अरुण कुमार मिश्र ने किया।

अतिथियों का स्वागत शिक्षाशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा अरविंद नारायण मिश्र ने किया।

कार्यक्रम का संचालन संयोजक मीनाक्षी सिंह रावत ने किया।

इस अवसर पर डा. विन्दुमती द्विवेदी, मनोज गहतोड़ी, भोपाल से डा. वरुण सौरभ, जयपुर से डा. मनीष चांडक, जम्मू से डा. मदन सिंह, डा. द्वारिका प्रसाद नौटियाल, डा. प्रदीप सेमवाल, मनीष शर्मा, विनीता चौहान आदि उपस्थित रहे।

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