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प्रधान संपादक सनत शर्मा :- संस्कृत होगी भविष्य की जनभाषा प्रो. शास्त्री ।

BySANAT SHARMA

Nov 12, 2022

प्रधान संपादक सनत शर्मा :- संस्कृत होगी भविष्य की जनभाषा प्रो. शास्त्री ।

*बहादराबाद।* उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के *एससी एसटी प्रकोष्ठ* के द्वारा *राष्ट्र निर्माण में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के शिक्षा दर्शन की उपादेयता* विषय पर एक दिवसीय *राष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी* का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आरंभ केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध लेखिका प्रोफेसर संतोष मित्तल, कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर दिनेशचंद्र शास्त्री एवं कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने संयुक्त रूप से किया।
वेद एवं पौरोहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अरुण कुमार मिश्र ने वैदिक मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की।

मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध शिक्षाविद प्रोफेसर संतोष मित्तल ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर प्रखर चिंतक,राजनीतिज्ञ,दार्शनिक, समाजसेवी एवं शिक्षाविद थे। उन्होंने न केवल दलित समाज के उत्थान के लिए महनीय प्रयास किया अपितु दलित, वंचित एवं शोषित समुदाय को संगठित कर उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए जागृत भी किया। उन्होंने कहां कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने 1942 में कहा था कि शिक्षित बनो, आंदोलन करो, आत्मविश्वासी बनो, अहंकार मत करो तथा हार मत मानो। उन्होंने बताया कि इन पंच सिद्धांतों को जीवन में उतार कर हम अपना, समाज एवं राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा डा. भीमराव अंबेडकर के अनुसार हमें शिक्षा के प्रसार को उतना ही महत्व देना चाहिए जितना कि हम राजनीतिक आंदोलन को महत्व देते हैं। वस्तुतः डॉक्टर भीमराव अंबेडकर शिक्षा दर्शन के प्रखर चिंतक थे, जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा पर्यंत छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु समावेशी शिक्षा को अत्यंत आवश्यक माना। शिक्षा वह साधन है जो हमें समरसता एवं एकात्म भाव सिखाती है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के शैक्षिक, सामाजिक,दार्शनिक एवं राजनीतिक चिंतन पर संगोष्ठी, कार्यशाला तथा अनुसंधान के माध्यम से कार्य हो जिससे हमारी भावी पीढ़ी उनके विचारों से लाभान्वित हो सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि हमारा समाज तथा हमारा देश डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का ऋणी है क्योंकि उन्होंने हमारे देश को एक ऐसा संविधान दिया है जो अत्यंत व्यावहारिक एवं सार्वभौमिक है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अत्यंत मनीषी एवं सत्य के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष थे। प्रोफेसर शास्त्री ने कहा की डॉक्टर भीमराव अंबेडकर वैदिक शिक्षा की मूल संकल्पना को हर भारतीय के मन में उतारना चाहते थे जहां समाज में समानता की बात हो समरसता की बात हो एकात्मता की बात हो और छुआछूत का विरोध हो। उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर 9 भाषाओं में प्रवीण एवं 64 विषयों में निपुणता रखते थे। उस समय जबकि शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत कठिन माना जाता था उन्होंने 32 डिग्रियों को प्राप्त किया। कहा कि वस्तुतः स्वामी दयानंद स्वामी श्रद्धानंद तथा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर महिलाओं के उत्थान तथा उन्हें बराबरी का हक दिलाने के लिए संघर्षरत रहे उन्होंने महिला अधिकार, समाज में महिला और पुरुष के बीच समानता एवं स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया। कहा कि डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने संस्कृत को राजभाषा बनाने पर अत्यंत बल दिया। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि संस्कृत भविष्य में प्रमुख भाषा होगी जिससे हमारा देश एक सूत्र में बंधकर विश्वगुरु बनेगा।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डा. शीशराम, विभागाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग, केंदीय संस्कृत विश्वविद्यालय, वेदव्यास परिसर ने तथा डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के विधि विभाग में कार्यरत डा. राजेश कुमार दुबे ने प्रस्तुतिकरण दिया।
तृतीय सत्र में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रणवीर परिसर के शिक्षाशास्त्र विभाग में कार्यरत डा. ऋषिराज तथा डा. प्रेमसिंह सिकरवार, शिक्षाशास्त्र विभाग, श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने प्रस्तुतियां दीं।
संपूर्ति सत्र में प्रो. विजयपाल कछवाह, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, सदाशिव परिसर, पुरी, उड़ीसा एवं संस्कृत भारती के योगेश विद्यार्थी, संगठन मंत्री, मेरठ प्रांत ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
समन्वयक डॉ सुशील कुमार चमोली ने कहा कि संगोष्ठी में दो सत्रों में 25 शोधपत्र पढ़े गए जिनका प्रकाशन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजक श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने किया।
कार्यक्रम का संचालन डा. सुमन प्रसाद भट्ट ने किया।
इस अवसर पर जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के विधि विभाग में प्रोफेसर डा. हरिमोहन मित्तल, डॉ बिंदुमती द्विवेदी, डॉ शैलेश कुमार तिवारी, डॉ उमेश शुक्ला, मनोज गहतोड़ी आदि उपस्थित रहे।

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